Skip to main content

दैनिक भास्कर ने माँ महामाया का प्रसाद अपने पाठकों के द्वार पहुंचाकर बनाया विश्व कीर्तिमान गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में रिकॉर्ड दर्ज

बिलासपुर, छतीसगढ़ में दैनिक भास्कर ने रतनपुर स्थित माँ महामाया के सिद्ध शक्तिपीठ का प्रसाद अपने लगभग 40 हज़ार पाठकों के घर अपनी प्रति के साथ पहुंचा कर एक इतिहास रच दिया। दैनिक भास्कर बिलासपुर एडिशन (Dainik Bhaskar, Bilaspur, Chhattisgarh) के स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दैनिक भास्कर और श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा यह अनूठी पहल की गई। रतनपुर स्थित माँ महामाया माता के मंदिर का निर्माण रत्नदेव प्रथम के शासन काल में हुआ था, तब से लेकर आज तक यह पवित्र शक्तिपीठ बिलासपुर ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में आस्था का केंद्र हैं। देश भर से श्रद्धालु यहाँ आकर श्री महामाया देवी का दर्शन लाभ लेकर अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने हेतु प्रार्थना करते हैं।

दैनिक भास्कर बिलासपुर और श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट द्वारा श्रद्धालुओं की इसी आस्था का सम्मान करते हुए एवं प्रसाद की पैकिंग से लेकर वितरण तक इसकी शुद्धता एवं पवित्रता का ख्याल रखते हुए दैनिक भास्कर बिलासपुर के स्थापना दिवस के विशेष अवसर पर 40 हज़ार घरो तक सिद्ध शक्तिपीठ श्री महामाया देवी मंदिर, रतनपुर (Siddha Shaktipith shri Mahamaya Devi Temple, Ratanpur) के प्रसाद को अपने विशेष अंक के साथ पहुँचाया गया। अखबार के साथ सर्वाधिक घरों में ड्राई फ्रूट के प्रसाद वितरण के इस प्रयास को प्रतिष्ठित संस्थान गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स (Golden Book of World Records) द्वारा वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में "Largest Distribution of Dry Fruit Prasad" के शीर्षक के साथ दर्ज किया गया। जिसका आधिकारिक सर्टिफिकेट गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स की प्रतिनिधि श्रीमती सोनल राजेश शर्मा जी (Mrs. Sonal Rajesh Shrama, GBWR)  द्वारा दैनिक भास्कर के सिरगिट्टी स्थित प्रिंटिंग प्लांट में पूरी प्रक्रिया के निरीक्षण के पश्चात  दैनिक भास्कर बिलासपुर के संपादक श्री हर्ष पाण्डेय जी (Mr. Harsh Pandey), यूनिट हैड श्री आशीष गौतम जी (Mr. Ashish Goutam) एवं श्री महामाया देवी मंदिर के ट्रस्टी श्री सुनील सोंथलिया जी (Mr. Sunil Sonthaliya) समेत दैनिक भास्कर की पूरी टीम को प्रदान किया। दैनिक भास्कर की इस उपलब्धि पर गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के एशिया हेड डॉ. मनीष विश्नोई जी (Dr. Manish Vishnoei, Asia Head, GBWR) द्वारा शुभकामनाए प्रेषित की गयी।

पूर्व में दैनिक भास्कर बिलासपुर द्वारा अपने 29वें स्थापना दिवस पर ट्रेनों के पुर्जों से दैनिक भास्कर का मास्ट हेड तैयार किया था जिसमे उपयोग किये गए पुर्जों का वजन 12 टन था। अपने इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष दैनिक भास्कर टीम एवं श्री महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट ने साथ मिलकर प्रसाद वितरण के यह एतिहासिक कार्य कर यह विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। प्रसाद वितरण की इस प्रक्रिया को सफल बनाने में माँ महामाया मंदिर ट्रस्ट रतनपुर के अध्यक्ष श्री आशीष सिंह जी  के अलावा मैनेजिंग ट्रस्टी श्री अरुण शर्मा जी , श्री सतीश शर्मा जी, श्री मनराखन जायसवाल जी, श्री रितेश जुनेजा जी, श्री अनिल खंडेलवाल जी, श्री धर्मेंद्र चंदेल जी एवं श्री शक्ति सिंह ठाकुर जी सहित ट्रस्ट के अन्य सभी सदस्य एवं दैनिक भास्कर की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।

मीडिया कवरेज -

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज:दैनिक भास्कर के साथ 40 हजार पाठकों के घरों तक पहुंचा मां महामाया का प्रसाद, बना नया वर्ल्ड रिकॉर्ड








Comments

Popular posts from this blog

सम्मेद शिखरजी, फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के स्वच्छता अभियान के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज

पारसनाथ पर्वत पर स्थित सम्मेद शिखरजी (Sammed Shikhar, Parasnath) जैन समुदाय के लिए सबसे पवित्र तीर्थों (Jain pilgrimage) में से एक है। यह वह तपोभूमि है जहाँ 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण यह पर्वत आध्यात्मिक जागृति, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु गहन भक्ति के साथ कठिन यात्रा कर इस पावन तीर्थ की आराधना करते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ पर्वत न केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता को संजोता है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध वातावरण भी प्रदान करता है। स्वच्छता, प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा जैन धर्म के अहिंसा और पवित्रता के संदेश को भी जीवंत करती है। स्वच्छ वातावरण भावी पीढ़ियों को भी इस यात्रा को गर्व और श्रद्धा के साथ करने हेतु प्रेरित करेगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, “सबसे अधिक लोगों द्वारा पर्वत को स्वच्छ रखने की शपथ” (Most People Pledged to Keep Mountain Clean) का विश्व रिकॉर्ड प्रयास फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज, इंटरनेश...

हजारों युवाओं ने एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के समक्ष राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली, बना विश्व रिकॉर्ड

     शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हरियाणा के गोहाना (Guhana,  Haryana) में देशभक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों युवाओं ने एक स्वर में राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली। यह आयोजन शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और बलिदान को नमन करने के साथ-साथ नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाने का प्रतीक बना। इस अवसर पर "शहीद भगत सिंह ब्रिगेड" (Shaheed Bhagat Singh Brigade) के तत्वावधान में एक विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया जिसमें सर्वाधिक लोगों द्वारा देश की शान, तिरंगे के सम्मान की शपथ लेने वाले का रिकॉर्ड स्थापित हुआ। शहीद भगत सिंह ब्रिगेड और श्री यादविंदर सिंह संधू जी यह विश्व रिकॉर्ड शहीद भगत सिंह ब्रिगेड द्वारा किया गया, जो देशभर में देशभक्ति, शहीदों के आदर्शों और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यरत संगठन है। इस ब्रिगेड की स्थापना और नेतृत्व श्री यादविंदर सिंह संधू (Mr. Yadvinder Singh Sandhu, Founder, Shaheed Bhagat Singh Brigade) द्वारा किया गया है, जो शहीद भगत सिंह के पारिवारिक वंशज हैं। श्री संधू लगातार युवाओं को प्रेरित करन...

बिहू नृत्य स्पिन्स से असम की बेटी दिदृक्षा सोनवाल ने रचा विश्व रिकॉर्ड

मुंबई में कार्यरत असम की युवा इंजीनियर दिदृक्षा सोनवाल (Didriksha Sonowal) ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (GBWR) में नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने “30 सेकंड में सर्वाधिक बिहू नृत्य स्पिन्स (Bihu dance spins)” का रिकॉर्ड अपने नाम किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Golden Book of World Records) द्वारा जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 27 अगस्त 2025 को ठाणे (महाराष्ट्र) में प्रदर्शित इस आयोजन में दिदृक्षा ने 72 स्पिन्स कर यह विश्व रिकॉर्ड कायम किया। बिहू: असम की पहचान बिहू असम की संस्कृति का हृदय है। ढोल की थाप और लयबद्ध घूमाव से सजा यह नृत्य अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान दर्ज करा चुका है। दिदृक्षा ने कहा-“मेरे लिए यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि असम की संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है। काम और जुनून के बीच संतुलन बनाकर भी संस्कृति को गौरव दिलाया जा सकता है।” मुंबई की कार्यसंस्कृति और उपलब्धि सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वर्तमान में मुंबई के कंस्ट्रक्शन केमिकल क्षेत्र में कार्यरत दिदृक्षा ने कठिन पेशेवर दिनचर्या के बावजूद इस रिकॉर्ड को हासिल किया। उनकी यह उपलब्...