Skip to main content

दिव्यांगजनों का अनूठा फ़ैशन शो गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज

फैशन और अभिव्यक्ति एक विशेषता है जो हर व्यक्ति के व्यक्तित्व को स्पष्ट करती है। फैशन एक माध्यम है जिसके माध्यम से हम अपने आप को दुनिया को दिखा सकते हैं और अपनी अद्वितीयता को प्रकट कर सकते हैं। इसी भावना के साथ, दिव्यांग फैशन शो ऐसा मंच है जहां दिव्यांग व्यक्तियों को उनकी अद्वितीय शैली को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। यह शो न केवल उनके स्वाभाविक रूप से सौंदर्य और स्टाइल की महत्त्वाकांक्षा को प्रोत्साहित करता है, बल्कि दृष्टिकोण बदलने की भावना को भी स्थापित करता है। और उन्हें खुद को समाज में स्वीकार करने का एक मंच प्रदान करता है।दिव्यांग फैशन शो एक महत्वपूर्ण और अद्वितीय आयोजन है, जो दिव्यांग समुदाय के सदस्यों को उनकी सुंदरता, प्रतिभा और अद्भुत व्यक्तित्व का प्रदर्शन करने का एक मंच प्रदान करता है। यह एक ऐसा समारोह है जो दिव्यांग फैशन डिजाइनरों, मॉडलों और समर्थकों को एकत्रित करता है ताकि उन्हें उनके योग्यतानुसार  समान मान्यता मिल सके।

भिलाई, छत्तीसगढ़ में एक एसे ही अनूठे फैशन एंड टेलेंट शो प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे रैंप पर मोडल्स के रूप में दिव्यंगों ने अपनी प्रस्तुति देते हुए अपनी प्रतिभाओं को प्रदर्शित किया। श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ संस्था (Shruti Foundation Chhattisgarh) एवं श्री शंकराचार्य महाविद्यालय जुनवानी (Shri Shankaracharya Mahavidyalaya Junvani) द्वारा संयुक्त रूप से इस प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन महाविद्यालय प्रागण में किया गया जिसमे दिव्यांगजनों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इस आयोजन में प्रदेश के शक्ति, रायपुर, बिलासपुर, बेमेतरा, कोरबा, भिलाई और दुर्ग जिलों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संस्था की उपाध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा सिंह (Mrs. Pratima Singh) ने बताया की दिव्यांगजनों के इस फैशन एंड टेलेंट शो में दिव्य हीरोज ने व्हील चेयर, बैसाखी, केलिपर्स और कृत्रिम अंगो पर अपने भार को संभालते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पहली बार एक नयी सोचा के साथ इस फैशन शो को करने का उद्देश्य दिव्यांगजनों को फ़ैशन की फील्ड में एक प्लेटफोर्म देना और उनके अन्दर की छुपी प्रतिभा को निखारना तथा प्रोत्साहित करना था।  इस फैशन शो को गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स (Golden Book of World Records) में एक वर्ल्ड रिकॉर्ड की रूप में दर्ज किया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती नीतू श्रीवास्तव (Mrs. Neetu Shrivastav) संस्थापिका, अध्यक्ष श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़,  डॉ. अर्चना झा (Dr. Archana Jha) प्रिंसिपल श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, प्रेरणा धबार्डे- मिसेज यूनिवर्स बेस्ट परफॉरमेंस भिलाई, पायल जैन - छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स महिला विंग अध्यक्ष दुर्ग,  प्रतिमा सिंह- मिसेज इंडिया इंटरनेशनल विनर 2022 प्रतापपुर, प्रज्ञा सिंह- शिक्षिका, निधि अग्रवाल अध्यक्ष राजश्री फाउंडेशन रायपुर, टीना खंडेलवाल- संचालिका इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन डिजाइनिंग एवं चोको मेनिया, विकास जायसवाल- संचालक आशीर्वाद ब्लड बैंक, प्रवीण भूतड़ा, डॉ. जे दुर्गा प्रसाद राव उपस्थित थे। मंच संचालन प्रोफ़ेसर लक्ष्मी वर्मा, प्रशांत श्रीवास्तव एवं शमसुद्दीन थारानी जी द्वारा किया गया। दिव्यांगजनों का मेक-उप सुमन देवांगन एवं कविता सिंह द्वारा किया गया। 

दिव्यांग फैशन शो प्रतियोगिता में पहला स्थान दुर्ग के खिलेश साहू को प्राप्त हुआ, भिलाई की वेंकट लक्ष्मी को दूसरा स्थान एवं भिलाई की ही चन्द्रकला राव को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। विजेताओं को नगद पुरुस्कार के अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया एवं अन्य सभी 20 को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए संस्था एवं महाविद्यालय के लोगों का सराहनीय योगदान रहा।    

न्यूज़ एवं मीडिया - 


















Comments

Popular posts from this blog

सम्मेद शिखरजी, फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के स्वच्छता अभियान के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज

पारसनाथ पर्वत पर स्थित सम्मेद शिखरजी (Sammed Shikhar, Parasnath) जैन समुदाय के लिए सबसे पवित्र तीर्थों (Jain pilgrimage) में से एक है। यह वह तपोभूमि है जहाँ 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण यह पर्वत आध्यात्मिक जागृति, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु गहन भक्ति के साथ कठिन यात्रा कर इस पावन तीर्थ की आराधना करते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ पर्वत न केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता को संजोता है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध वातावरण भी प्रदान करता है। स्वच्छता, प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा जैन धर्म के अहिंसा और पवित्रता के संदेश को भी जीवंत करती है। स्वच्छ वातावरण भावी पीढ़ियों को भी इस यात्रा को गर्व और श्रद्धा के साथ करने हेतु प्रेरित करेगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, “सबसे अधिक लोगों द्वारा पर्वत को स्वच्छ रखने की शपथ” (Most People Pledged to Keep Mountain Clean) का विश्व रिकॉर्ड प्रयास फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज, इंटरनेश...

हजारों युवाओं ने एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के समक्ष राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली, बना विश्व रिकॉर्ड

     शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हरियाणा के गोहाना (Guhana,  Haryana) में देशभक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों युवाओं ने एक स्वर में राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली। यह आयोजन शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और बलिदान को नमन करने के साथ-साथ नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाने का प्रतीक बना। इस अवसर पर "शहीद भगत सिंह ब्रिगेड" (Shaheed Bhagat Singh Brigade) के तत्वावधान में एक विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया जिसमें सर्वाधिक लोगों द्वारा देश की शान, तिरंगे के सम्मान की शपथ लेने वाले का रिकॉर्ड स्थापित हुआ। शहीद भगत सिंह ब्रिगेड और श्री यादविंदर सिंह संधू जी यह विश्व रिकॉर्ड शहीद भगत सिंह ब्रिगेड द्वारा किया गया, जो देशभर में देशभक्ति, शहीदों के आदर्शों और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यरत संगठन है। इस ब्रिगेड की स्थापना और नेतृत्व श्री यादविंदर सिंह संधू (Mr. Yadvinder Singh Sandhu, Founder, Shaheed Bhagat Singh Brigade) द्वारा किया गया है, जो शहीद भगत सिंह के पारिवारिक वंशज हैं। श्री संधू लगातार युवाओं को प्रेरित करन...

बिहू नृत्य स्पिन्स से असम की बेटी दिदृक्षा सोनवाल ने रचा विश्व रिकॉर्ड

मुंबई में कार्यरत असम की युवा इंजीनियर दिदृक्षा सोनवाल (Didriksha Sonowal) ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (GBWR) में नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने “30 सेकंड में सर्वाधिक बिहू नृत्य स्पिन्स (Bihu dance spins)” का रिकॉर्ड अपने नाम किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Golden Book of World Records) द्वारा जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 27 अगस्त 2025 को ठाणे (महाराष्ट्र) में प्रदर्शित इस आयोजन में दिदृक्षा ने 72 स्पिन्स कर यह विश्व रिकॉर्ड कायम किया। बिहू: असम की पहचान बिहू असम की संस्कृति का हृदय है। ढोल की थाप और लयबद्ध घूमाव से सजा यह नृत्य अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान दर्ज करा चुका है। दिदृक्षा ने कहा-“मेरे लिए यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि असम की संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है। काम और जुनून के बीच संतुलन बनाकर भी संस्कृति को गौरव दिलाया जा सकता है।” मुंबई की कार्यसंस्कृति और उपलब्धि सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वर्तमान में मुंबई के कंस्ट्रक्शन केमिकल क्षेत्र में कार्यरत दिदृक्षा ने कठिन पेशेवर दिनचर्या के बावजूद इस रिकॉर्ड को हासिल किया। उनकी यह उपलब्...