स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में हज़ारों लोगों नें नशामुक्ति हेतु अरदास कर रचा इतिहास, गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज
पंजाब पुलिस का आदर्श वाक्य है, "शुभ कर्मण ते कबहुं न तरूण", इसका मतलब है "नेक रास्ते पर चलने से कभी नहीं डरना चाहिए"। पंजाब पुलिस ने इस आदर्श वाक्य को अपनाया है और जनमानस की सेवा एवं सुरक्षा को प्राथमिकता प्रदान की है। अपने इसी कर्तव्य पथ पर चलते हुए कमिश्नरेट पुलिस, अमृतसर (Commissionerate of Police, Amritsar) द्वारा नशे के विरुद्ध एक मुहिम "द होप इनिशिएटिव: ड्राइव अगेंस्ट ड्रग" की शुरुआत की। नशा मानव एवं समाज के लिए एक ऐसा अभिशाप हैं, जो दीमक की तरह समाज और नशे के आदी व्यक्ति को पूरी तरह अन्दर से खोखला कर धीरे-धीरे नष्ट कर रहा हैं। आज की तारीख में इससे देश का युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जो नशे को फैशन और स्टेटस सिंबल के रूप जानकर, उसके प्रति आकर्षित होकर, अपने जीवन और भविष्य का नाश कर रहे हैं। राज्य को नशे की इसी बीमारी से बचाने के लिए अमृतसर पुलिस द्वारा नशा विरोधी मुहिम "द होप इनिशिएटिव" को सफल बनाने के लिए तीन स्तरीय रणनीति बनाई गयी, जिसके अंतर्गत "Prey, Pledge & Play" अर्थात "प्रार्थना, प्रतिज्ञा, एवं खेल" के माध्यम से राज्य को नशामुक्त एवं सेहतमंद बनाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
पंजाब को नशामुक्त करने के उद्देश्य से दिनांक 18 अक्टूबर 2023 को अमृतसर पुलिस कमिश्नर श्री नौनिहाल सिंह जी (Mr. Naunihal Singh, IPS, Commissioner of Police Amritsar) एवं पुलिस महानिर्देशक, श्री गौरव यादव जी (Mr. Gourav Yadav, IPS, DGP Punjab Police) के मार्गदर्शन एवं The Congenital Anomaly Treatment Trust (CATT) के सहयोग से अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में "द होप इनिशिएटिव: ड्राइव अगेंस्ट ड्रग" के अंतर्गत पीली पगड़ियां, पटके और चुनरियों से सजे 35000 से भी अधिक विद्यार्थियों एवं युवाओं द्वारा पंजाब को नशे से मुक्त करने एवं सेहतमंद रखने हेतु अरदास (प्रार्थना) की गयी एवं साथ ही कभी स्वयं नशा न करने एवं दूसरों को नशा करने से रोकने हेतु संकल्प भी लिया। सर्वाधिक लोगों द्वारा एक साथ नशामुक्ति हेतु प्रार्थना किये जाने के इस कार्य को "Largest Mass Prayer for Drug De-addiction" के शीर्षक के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में गोल्डन बुक ऑफ़ रिकार्ड्स (Golden Book of World Records) में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया गया। वर्ल्ड रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रोविजनल सर्टिफिकेट कार्यक्रम के पश्चात गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स के एशिया हेड डॉ. मनीष विश्नोई जी (Dr. Manish Vishnoei, Asia Head, GBWR) द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान जी (Mr. Bhagwant Maan, CM Punjab) को पुलिस महानिदेशक श्री गौरव यादव जी, पुलिस कमिश्नर श्री नौनिहाल सिंह जी, राज्यसभा सदस्य श्री विक्रम जीत साहनी जी एवं मंत्री श्री कुलदीप सिंह धालीवाल जी की उपस्थिति में प्रदान किया गया। विश्व रिकॉर्ड बनने पर मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान जी ने बधाई देते हुए कहा कि ''सभी घरों के चिराग जलते रहने चाहिए, पर यह तभी संभव हैं, जब युवा वर्ग नशे से दूर रहे"। नशा मुक्ति हेतु अरदास के इस कार्यक्रम में हजारों युवा ऑनलाइन भी जुड़े।
"द होप इनिशिएटिव: ड्राइव अगेंस्ट ड्रग" के तृतीय स्तर "Play" अर्थात खेल के अंतर्गत युवाओं को नशे से दूर रखने एवं नशे की मांग को ख़त्म करने के उद्देश्य से गाँधी ग्राउंड में "होप कप टूर्नामेंट" का भी आयोजन किया गया जिसका शुभारम्भ मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान जी द्वारा किया गया। इस टूर्नामेंट में बहुत सारी टीमों द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है, हो सकता हैं आने वाले समय में यह "होप कप टूर्नामेंट" भी गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाने मे सफल हो। पुलिस कमिश्नर श्री नौनिहाल सिंह जी का यह कहना हैं कि "अगर युवा खेलों के प्रति लग जाएँगे तो नशे की तरफ उनका ध्यान नहीं होगा जिसके फलस्वरुप नशे की मांग न होने के कारण नशे पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी"। यह विश्व कीर्तिमान पंजाब के युवाओं को नशे से दूर ले जाने के उद्देश्य से ही बनाया गया है, इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की इसमे भागीदारी पंजाब के उज्जवल भविष्य का संकेत है।
पारसनाथ पर्वत पर स्थित सम्मेद शिखरजी (Sammed Shikhar, Parasnath) जैन समुदाय के लिए सबसे पवित्र तीर्थों (Jain pilgrimage) में से एक है। यह वह तपोभूमि है जहाँ 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण यह पर्वत आध्यात्मिक जागृति, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु गहन भक्ति के साथ कठिन यात्रा कर इस पावन तीर्थ की आराधना करते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ पर्वत न केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता को संजोता है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध वातावरण भी प्रदान करता है। स्वच्छता, प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा जैन धर्म के अहिंसा और पवित्रता के संदेश को भी जीवंत करती है। स्वच्छ वातावरण भावी पीढ़ियों को भी इस यात्रा को गर्व और श्रद्धा के साथ करने हेतु प्रेरित करेगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, “सबसे अधिक लोगों द्वारा पर्वत को स्वच्छ रखने की शपथ” (Most People Pledged to Keep Mountain Clean) का विश्व रिकॉर्ड प्रयास फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज, इंटरनेश...
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हरियाणा के गोहाना (Guhana, Haryana) में देशभक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों युवाओं ने एक स्वर में राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली। यह आयोजन शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और बलिदान को नमन करने के साथ-साथ नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाने का प्रतीक बना। इस अवसर पर "शहीद भगत सिंह ब्रिगेड" (Shaheed Bhagat Singh Brigade) के तत्वावधान में एक विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया जिसमें सर्वाधिक लोगों द्वारा देश की शान, तिरंगे के सम्मान की शपथ लेने वाले का रिकॉर्ड स्थापित हुआ। शहीद भगत सिंह ब्रिगेड और श्री यादविंदर सिंह संधू जी यह विश्व रिकॉर्ड शहीद भगत सिंह ब्रिगेड द्वारा किया गया, जो देशभर में देशभक्ति, शहीदों के आदर्शों और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यरत संगठन है। इस ब्रिगेड की स्थापना और नेतृत्व श्री यादविंदर सिंह संधू (Mr. Yadvinder Singh Sandhu, Founder, Shaheed Bhagat Singh Brigade) द्वारा किया गया है, जो शहीद भगत सिंह के पारिवारिक वंशज हैं। श्री संधू लगातार युवाओं को प्रेरित करन...
मुंबई में कार्यरत असम की युवा इंजीनियर दिदृक्षा सोनवाल (Didriksha Sonowal) ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (GBWR) में नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने “30 सेकंड में सर्वाधिक बिहू नृत्य स्पिन्स (Bihu dance spins)” का रिकॉर्ड अपने नाम किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Golden Book of World Records) द्वारा जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 27 अगस्त 2025 को ठाणे (महाराष्ट्र) में प्रदर्शित इस आयोजन में दिदृक्षा ने 72 स्पिन्स कर यह विश्व रिकॉर्ड कायम किया। बिहू: असम की पहचान बिहू असम की संस्कृति का हृदय है। ढोल की थाप और लयबद्ध घूमाव से सजा यह नृत्य अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान दर्ज करा चुका है। दिदृक्षा ने कहा-“मेरे लिए यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि असम की संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है। काम और जुनून के बीच संतुलन बनाकर भी संस्कृति को गौरव दिलाया जा सकता है।” मुंबई की कार्यसंस्कृति और उपलब्धि सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वर्तमान में मुंबई के कंस्ट्रक्शन केमिकल क्षेत्र में कार्यरत दिदृक्षा ने कठिन पेशेवर दिनचर्या के बावजूद इस रिकॉर्ड को हासिल किया। उनकी यह उपलब्...
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