Skip to main content

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में मनोहर गौशाला का नाम दर्ज

हिन्दू सभ्यता भारतीय समाज की आधारभूत धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसके भीतर गाय का महत्व अत्यधिक है। गाय, या "गौ माता," हिन्दू धर्म में पूजी जाने वाली एक पावन प्राणी है, और उसके साथ गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। भारतीय संस्कृति में गाय पवित्रता, मातृत्व और पोषण का प्रतीक है और इसकी सुरक्षा एक गहरा मूल्य है। अपने सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व से परे, गायें भारत की अर्थव्यवस्था में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे दूध प्रदान करते हैं, जो कई भारतीयों के लिए पोषण का प्राथमिक स्रोत है, और उनके गोबर का उपयोग ईंधन और उर्वरक के रूप में किया जाता है। इसके अलावा, घी, मक्खन और दही जैसे गाय-आधारित उत्पाद भारतीय व्यंजनों का अभिन्न अंग हैं। गायों का आर्थिक मूल्य कृषि तक फैला हुआ है, जहाँ उनका उपयोग खेतों की जुताई और माल परिवहन के लिए किया जाता है। उनके बहुमुखी महत्व को देखते हुए, भारत में गायें सिर्फ प्राणी नहीं हैं; वे देश की सांस्कृतिक विरासत, अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन के लिए आवश्यक हैं। 

"गाय का करो सम्मान, गाय हैं माँ समान"  यह नारा है सतत जीव दया व सेवाभावी कार्यों के लिये प्रतिष्ठित हो चुके छत्तीसगढ़, खैरागढ़ के धरमपुरा स्थित मनोहर गौशाला (Manohar Gaushala) का यहां बूढी और अशक्त गायों की सेवा की जाती हैं। गौशाला की शुरुआत महज 18,000 वर्ग फीट जमीन से हुई. वर्तमान में यह 11 एकड़ भूमि और 10 एकड़ किराये की भूमि पर फैला हुआ है। संगठन का लक्ष्य 100 एकड़ और 25 एकड़ के घने जंगल में फैली एक आत्मनिर्भर गौशाला बनाना है जहां हजारों गायें रह सकें। मनोहर गौशाला में निर्मित फसल अमृत किसानों को लाभदायक उपज उगाने में मदद करता है और अपर्याप्त पानी या पोषक तत्वों के कारण फसलों को संभावित नुकसान से बचाता है। यह जैविक जल-धारण करने वाला हाइड्रोजेल कृषि में अभूतपूर्व बदलाव ला रहा है और भारतीय किसानों के बीच पसंदीदा बन रहा है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय व रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों द्वारा मनोहर गौशाला में निर्मित फसल अमृत को पर्यावरण संरक्षण व मानव स्वास्थ्य के लिये बहुउपयोगी बताया गया है और इस पर आगे भी शोध कार्य जारी है। यूनिवर्सिटी के रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर डॉ.विवेक त्रिपाठी सहित डॉ.एलके श्रीवास्तव व अन्य चार वैज्ञानिकों ने इस कार्य के लिये शोध अवधि को बढ़ाया है और कहा है कि फसल अमृत देश के कृषकों के लिये एक अनुपम उपहार साबित होगा।

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स (Golden Book of World Record) में मनोहर गौशाला को दो श्रेणियों में नामांकित कर सम्मानित किया गया है। बता दे कि विश्व स्तर पर सर्वाधिक गौ मूत्र अर्क वितरण करने के लिये मनोहर गौशाला एवं श्रीमती कमला बाई कन्हैयालाल डाकलिया चैरिटी ट्रस्ट (Smt. Kamla Bai Kanhaiyalala Dakaliya Charity Trust) को "Largest Distribution of Gomutra Ark"  के शीर्षक के साथ तथा गौशाला के गोबर से निर्मित दीयों (दीपक) के सर्वाधिक नि:शुल्क वितरण के लिये "Largest Distribution of Earthen Lamp Made With Cow Dung" के शीर्षक के साथ गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में एक विश्व कीर्तिमान के रूप में स्थान प्राप्त हुआ। मनोहर गौशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी अखिल जैन (पदम डाकलिया) ने बताया कि अब तक गौशाला से 12 हजार बोतल गौ मूत्र अर्क व गौशाला के गोबर से बने 3 लाख 50 हजार से अधिक दीये (दीपक) नि:शुल्क वितरित किये जा चुके हैं।  

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स द्वारा मिले दोनों सम्मान को मनोहर गौशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी अखिल जैन (पदम डाकलिया) रायपुर, ट्रस्टी पुखराज कोठारी चेन्नई, महेन्द्र लोढ़ा व प्रवीण पारख रायपुर, तेजराज गोलछा बैंगलुरू, मनीष बोथरा दुर्ग, समाजसेवी राजेन्द्र डाकलिया, नरेन्द्र बोथरा, चमन डाकलिया, भजन गायक नमन-जैनम डाकलिया सहित सैकड़ों गौ सेवकों के बीच गौशाला में उक्त सम्मान को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स की प्रतिनिधि श्रीमती सोनल राजेश शर्मा जी (Mrs. Sonal Rajesh Sharma, Team GBWR) के द्वारा प्राप्त किया गया। इससे पहले गौशाला के ट्रस्टी पदम डाकलिया ने उक्त दोनों सम्मान को छग की पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसूईया उइके जी को राजभवन मेंं समर्पित किया। बता दे कि सुश्री अनुसूईया उइके जी मनोहर गौशाला के कार्यों से जुड़ी रही हैं और लगातार माता कामधेनु के दर्शन व गौशाला के विविध कार्यों के उत्साहवर्धन के लिये उनका सहयोग मिलता रहा है।

छत्तीसगढ़, खैरागढ़ के धरमपुरा स्थित गौ सेवा के लिए समर्पित मनोहर गौशाला में मौजूद कामधेनु गाय को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का अलंकरण प्रदान किया जा चूका हैं। ट्रस्ट ने गौ माता को सौम्या कामधेनु गौ माता का नाम दिया है। यह सम्मान विश्व में सबसे लंबी पूंछ वाली गाय होने के कारण दिया गया है। इससे पहले यह सम्मान ब्राजील में मौजूद गाय को मिला था। जिसके पूंछ की लंबाई 48 इंच थी। सौम्या कामधेनु गाय की पूंछ की लंबाई 54 इंच है। इसीलिए संस्था गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के द्वारा "Longest Tail of Cow" के शीर्षक के साथ  सौम्या कामधेनु का नाम एक वर्ल्ड रिकॉर्ड के रुप में दर्ज किया गया। विश्व में इस तरह की सिर्फ चार से पांच गाय मौजूद हैं। श्रीकमलाबाई कन्हैया लाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने कामधेनु गाय को जैसलमेर से लाकर मनोहर गौशाला में लाकर रखा था, तब से यहाँ  गौ माता सौम्या कामधेनु की अनवरत सेवा जारी है। इससे पहले स्वच्छता के लिए भी गौशाला को सम्मानित किया जा चुका है।


Comments

Popular posts from this blog

सम्मेद शिखरजी, फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के स्वच्छता अभियान के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज

पारसनाथ पर्वत पर स्थित सम्मेद शिखरजी (Sammed Shikhar, Parasnath) जैन समुदाय के लिए सबसे पवित्र तीर्थों (Jain pilgrimage) में से एक है। यह वह तपोभूमि है जहाँ 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण यह पर्वत आध्यात्मिक जागृति, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु गहन भक्ति के साथ कठिन यात्रा कर इस पावन तीर्थ की आराधना करते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ पर्वत न केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता को संजोता है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध वातावरण भी प्रदान करता है। स्वच्छता, प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा जैन धर्म के अहिंसा और पवित्रता के संदेश को भी जीवंत करती है। स्वच्छ वातावरण भावी पीढ़ियों को भी इस यात्रा को गर्व और श्रद्धा के साथ करने हेतु प्रेरित करेगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, “सबसे अधिक लोगों द्वारा पर्वत को स्वच्छ रखने की शपथ” (Most People Pledged to Keep Mountain Clean) का विश्व रिकॉर्ड प्रयास फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज, इंटरनेश...

हजारों युवाओं ने एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के समक्ष राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली, बना विश्व रिकॉर्ड

     शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हरियाणा के गोहाना (Guhana,  Haryana) में देशभक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों युवाओं ने एक स्वर में राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली। यह आयोजन शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और बलिदान को नमन करने के साथ-साथ नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाने का प्रतीक बना। इस अवसर पर "शहीद भगत सिंह ब्रिगेड" (Shaheed Bhagat Singh Brigade) के तत्वावधान में एक विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया जिसमें सर्वाधिक लोगों द्वारा देश की शान, तिरंगे के सम्मान की शपथ लेने वाले का रिकॉर्ड स्थापित हुआ। शहीद भगत सिंह ब्रिगेड और श्री यादविंदर सिंह संधू जी यह विश्व रिकॉर्ड शहीद भगत सिंह ब्रिगेड द्वारा किया गया, जो देशभर में देशभक्ति, शहीदों के आदर्शों और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यरत संगठन है। इस ब्रिगेड की स्थापना और नेतृत्व श्री यादविंदर सिंह संधू (Mr. Yadvinder Singh Sandhu, Founder, Shaheed Bhagat Singh Brigade) द्वारा किया गया है, जो शहीद भगत सिंह के पारिवारिक वंशज हैं। श्री संधू लगातार युवाओं को प्रेरित करन...

बिहू नृत्य स्पिन्स से असम की बेटी दिदृक्षा सोनवाल ने रचा विश्व रिकॉर्ड

मुंबई में कार्यरत असम की युवा इंजीनियर दिदृक्षा सोनवाल (Didriksha Sonowal) ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (GBWR) में नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने “30 सेकंड में सर्वाधिक बिहू नृत्य स्पिन्स (Bihu dance spins)” का रिकॉर्ड अपने नाम किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Golden Book of World Records) द्वारा जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 27 अगस्त 2025 को ठाणे (महाराष्ट्र) में प्रदर्शित इस आयोजन में दिदृक्षा ने 72 स्पिन्स कर यह विश्व रिकॉर्ड कायम किया। बिहू: असम की पहचान बिहू असम की संस्कृति का हृदय है। ढोल की थाप और लयबद्ध घूमाव से सजा यह नृत्य अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान दर्ज करा चुका है। दिदृक्षा ने कहा-“मेरे लिए यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि असम की संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है। काम और जुनून के बीच संतुलन बनाकर भी संस्कृति को गौरव दिलाया जा सकता है।” मुंबई की कार्यसंस्कृति और उपलब्धि सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वर्तमान में मुंबई के कंस्ट्रक्शन केमिकल क्षेत्र में कार्यरत दिदृक्षा ने कठिन पेशेवर दिनचर्या के बावजूद इस रिकॉर्ड को हासिल किया। उनकी यह उपलब्...