Skip to main content

उत्तम सिंह ने पीछे की ओर हैंडस्टैंड वॉक करते हुए कार खींचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया


शक्ति, धैर्य और अटूट संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण पेश करते हुए, डॉ. उत्तम सिंह, महोबा, उत्तर प्रदेश (Dr. Uttam Singh, Mahoba, UttarPradesh,  India) के निवासी, ने एक अद्वितीय विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उन्होंने पीछे की ओर हैंडस्टैंड वॉक करते हुए कार को 54.20 मीटर (चौंसठ मीटर बीस सेंटीमीटर) तक खींचा। इस अविश्वसनीय उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Golden Book of World Records) द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है।


संघर्ष और साहस की प्रेरणादायक यात्रा

डॉ. उत्तम सिंह की यह उपलब्धि सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि साहस और संघर्ष की एक मिसाल भी है। वर्ष 1996 में मथुरा में एक गंभीर दुर्घटना के दौरान उन्हें एक पैर की क्षति हुई। यह कठिन परिस्थिति उन्हें पराजित नहीं कर सकी। उन्होंने इसे अपने जीवन का एक नया अध्याय बनाने का अवसर समझा।

अपनी क्षमताओं को चुनौती देने के लिए डॉ. उत्तम ने ज़ोरदार प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने जिम्नास्टिक्स और हैंडस्टैंड वॉकिंग में खुद को निखारा। उनकी प्रतिभा और साहस ने उन्हें राष्ट्रीय मंच इंडिया गॉट टैलेंट में अपनी अद्भुत क्षमता दिखाने का अवसर दिलाया।

डॉ. सिंह यह स्पष्ट करते हैं कि उनकी विकलांगता कमजोरी नहीं, बल्कि उनकी ताकत का स्रोत बनी। इसी विश्वास ने उन्हें कई प्रतियोगिताओं में जीत दिलाई है।


विश्व रिकॉर्ड की उपलब्धि

28 जुलाई, 2025 को डॉ. उत्तम सिंह ने केवल अपने हाथों के बल चलते हुए पीछे की ओर हैंडस्टैंड वॉक करते हुए एक कार को 54.20 मीटर दूर तक खींचा। यह प्रयास पूर्णतः शक्ति, सामर्थ्य, संतुलन और मानसिक एकाग्रता का परिपूर्ण मिश्रण था।

डॉ. मनीष विश्नोई, एशिया हेड, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Dr. Manish Vishnoei, Asia Head, Golden Book of World Records), ने कहा, "यह अनूठी उपलब्धि बेहद सटीक रूप से सत्यापित और प्रमाणित की गई है। हम डॉ. उत्तम सिंह को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपने नाम को स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराने के लिए बधाई देते हैं। यह उपलब्धि न केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि मानव आत्मा की चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक भी है, जो दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है।"


प्रशंसा और विरासत

डॉ. उत्तम सिंह की यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई है और विशेष रूप से विकलांग व्यक्तियों को समाज की सीमाओं को चुनौती देने के लिए प्रेरित करती है। उनका जीवन इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि साहस और आत्म-विश्वास से जीवन की सबसे बड़ी बाधाएं भी अवसर में बदली जा सकती हैं।

श्री आलोक कुमार, इंडिया हेड, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Mr. Alok Kumar, India head, GBWR) ने डॉ. सिंह को बधाई देते हुए कहा,

"डॉ. उत्तम सिंह का विश्व रिकॉर्ड सिर्फ शारीरिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन और संकल्प की जीवन्त उदाहरण है। उनकी सफलता की कहानी लोगों को प्रेरित करती है कि विकलांगता कोई बाधा नहीं, बल्कि महानता की ओर पहला कदम है।"

डॉ. उत्तम सिंह अपनी यात्रा, प्रशिक्षण विधियाँ, और अन्य उपलब्धियों की नियमित अपडेट अपने यूट्यूब चैनल पर साझा करते हैं: Uttam Singh World Records Holder Mahoba

न्यूज़ एवं मीडिया कवरेज़ :-






Other Links :-

उत्तम सिंह ने पीछे की ओर हैंडस्टैंड वॉक करते हुए कार खींचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया

Uttam Singh Set World Record by Pulling a Car While Performing Backward Handstand Walk

Longest Pulling A Car While Backward  Handstand Walk

Golden Book of World Records

विकलांगता को बनाया अपनी शक्ति – डॉक्टर उत्तम सिंह यादव ने 54.20 मीटर तक उल्टे होकर गाड़ी खींचकर किया असंभको संभव

YouTube Channel – Uttam Singh World Records Holder Mahoba

21 लाख रुपये और 1 लाख रुपये = 22 लाख रुपये सम्मान सहित इनाम



Comments

Popular posts from this blog

सम्मेद शिखरजी, फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के स्वच्छता अभियान के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज

पारसनाथ पर्वत पर स्थित सम्मेद शिखरजी (Sammed Shikhar, Parasnath) जैन समुदाय के लिए सबसे पवित्र तीर्थों (Jain pilgrimage) में से एक है। यह वह तपोभूमि है जहाँ 24 में से 20 जैन तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया। इसी कारण यह पर्वत आध्यात्मिक जागृति, आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु गहन भक्ति के साथ कठिन यात्रा कर इस पावन तीर्थ की आराधना करते हैं। ऐसे पवित्र स्थलों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छ पर्वत न केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता को संजोता है, बल्कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को शुद्ध वातावरण भी प्रदान करता है। स्वच्छता, प्रकृति और आध्यात्मिकता के प्रति सम्मान का प्रतीक है तथा जैन धर्म के अहिंसा और पवित्रता के संदेश को भी जीवंत करती है। स्वच्छ वातावरण भावी पीढ़ियों को भी इस यात्रा को गर्व और श्रद्धा के साथ करने हेतु प्रेरित करेगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, “सबसे अधिक लोगों द्वारा पर्वत को स्वच्छ रखने की शपथ” (Most People Pledged to Keep Mountain Clean) का विश्व रिकॉर्ड प्रयास फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज, इंटरनेश...

हजारों युवाओं ने एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के समक्ष राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली, बना विश्व रिकॉर्ड

     शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की जयंती के अवसर पर हरियाणा के गोहाना (Guhana,  Haryana) में देशभक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जहाँ हजारों युवाओं ने एक स्वर में राष्ट्रध्वज के सम्मान की शपथ ली। यह आयोजन शहीद भगत सिंह के अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और बलिदान को नमन करने के साथ-साथ नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जगाने का प्रतीक बना। इस अवसर पर "शहीद भगत सिंह ब्रिगेड" (Shaheed Bhagat Singh Brigade) के तत्वावधान में एक विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया जिसमें सर्वाधिक लोगों द्वारा देश की शान, तिरंगे के सम्मान की शपथ लेने वाले का रिकॉर्ड स्थापित हुआ। शहीद भगत सिंह ब्रिगेड और श्री यादविंदर सिंह संधू जी यह विश्व रिकॉर्ड शहीद भगत सिंह ब्रिगेड द्वारा किया गया, जो देशभर में देशभक्ति, शहीदों के आदर्शों और राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने के लिए कार्यरत संगठन है। इस ब्रिगेड की स्थापना और नेतृत्व श्री यादविंदर सिंह संधू (Mr. Yadvinder Singh Sandhu, Founder, Shaheed Bhagat Singh Brigade) द्वारा किया गया है, जो शहीद भगत सिंह के पारिवारिक वंशज हैं। श्री संधू लगातार युवाओं को प्रेरित करन...

बिहू नृत्य स्पिन्स से असम की बेटी दिदृक्षा सोनवाल ने रचा विश्व रिकॉर्ड

मुंबई में कार्यरत असम की युवा इंजीनियर दिदृक्षा सोनवाल (Didriksha Sonowal) ने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (GBWR) में नाम दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने “30 सेकंड में सर्वाधिक बिहू नृत्य स्पिन्स (Bihu dance spins)” का रिकॉर्ड अपने नाम किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Golden Book of World Records) द्वारा जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 27 अगस्त 2025 को ठाणे (महाराष्ट्र) में प्रदर्शित इस आयोजन में दिदृक्षा ने 72 स्पिन्स कर यह विश्व रिकॉर्ड कायम किया। बिहू: असम की पहचान बिहू असम की संस्कृति का हृदय है। ढोल की थाप और लयबद्ध घूमाव से सजा यह नृत्य अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान दर्ज करा चुका है। दिदृक्षा ने कहा-“मेरे लिए यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि असम की संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम है। काम और जुनून के बीच संतुलन बनाकर भी संस्कृति को गौरव दिलाया जा सकता है।” मुंबई की कार्यसंस्कृति और उपलब्धि सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वर्तमान में मुंबई के कंस्ट्रक्शन केमिकल क्षेत्र में कार्यरत दिदृक्षा ने कठिन पेशेवर दिनचर्या के बावजूद इस रिकॉर्ड को हासिल किया। उनकी यह उपलब्...