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छत्तीसगढ़ के मधेश्वर पहाड़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज

CM Vishnudev Saay with Record certificate

 पुराणों के अनुसार हिन्दू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं की मान्यता है जिनमें से तीन देवों को वरिष्ठ देवो की मान्यता दी गई है जिनको त्रिदेव के नाम से जाना जाता है। इन्हीं तीन देवो में से एक है भगवान शिव (Lord Shiva)। भगवान शंकर को दुनिया भर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है एवं ज्यादातर स्थानो पर इनकी पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है। सभी शिवलिंगों में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग प्रमुख माने गए हैं। स्कंध पुराण में शिवलिंग को अनंत आकाश कहा गया है। भगवान शिव को देवों के देव भी कहा जाता है जिसके कारण इन्हें महादेव के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया भर में अलग-अलग स्थानों में स्थित शिवलिंगों में से एक है मधेश्वर महादेव (Madheshwar Mahadev)। मधेश्वर महादेव, जशपुर नगर से 29 किलोमीटर दूर चाराइदाण्ड नाम के स्थान से बगीचा जाने वाले मार्ग की ओर 4 किलोमीटर दूरी की स्थिति पर स्थित है l दन्त कथाओं में यह वर्णित है कि जब क्षेत्र के लोग परेशान थे और इस क्षेत्र में डॉम राजाओं का काल था उसी काल में लोगों के दुख दूर करने के लिए लोगों की दुखियों की मदद करने के लिए मदेश्वर या मधेश्वर महादेव के नाम से वे अवतरित हुएl मंदिर में पूजा से जुड़े श्री जगनराम जी ने बतलाया कि  यहाँ सावन सोमवार में न सिर्फ जशपुर नगर बल्कि दूर प्रदेश और अन्य प्रदेशों से भी भक्त पूजा अर्चना के लिए आते हैं l इसके सबसे ऊपरी भाग पर लोग पहाड़ों पर चढ़ते हुए शिवलिंग की भांति जल अर्पित करने जाते हैं l वहां ऊपर एक अधूरा मंदिर है और कहा जाता है कि वहां पर देवी की भी पूजा होती है। वर्तमान में यहां नियमित रूप से ग्राम बैगा द्वारा पूजा की जाती हैंl यह भी कथाओं में प्रचलित है कि जब कभी इस क्षेत्र में अकाल पड़ा या वर्षा के कारण खेती नहीं होती थी तब लोग खाली टोकरियों को गुफाओं के नीचे रखते जाते थे और दूसरे दिन वह अनाज से भरा होता था और ऐसा माना जाता था कि यह क्षेत्र, लोगों की मदद करने के लिए महादेव द्वारा दिया गया वरदान था l

Golden Book Of World Records Certificate

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित मधेश्वर पहाड़ (Madheshwar Hill) जिसे मधेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है उन्हें 'विश्व की सबसे बड़ी प्राकृतिक शिवलिंग' के रूप में मान्यता मिली है। इस एतिहासिक उपलब्धि को " गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स (Golden Book Of World Records)" में स्थान मिला है रिकॉर्ड बुक में इस उपलब्धि को "लार्जेस्ट नेचुरल फैक्सिमिली ऑफ शिवलिंग(Largest Natural Facsimile Of Shivling)" के शीर्षक के साथ मधेश्वर पहाड़ को दर्ज किया गया है। मधेश्वर पहाड़ 275 मीटर लंबा 1183 मीटर परिधि का है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के प्रतिनिधि श्रीमती हेमल शर्मा जी(Ms. Hemal Sharma, GBWR) और श्री अमित सोनी जी(Mr. Amit Soni, GBWR) ने वर्ल्ड रिकार्ड का सर्टिफिकेट छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी(Mr. Vishnudev Saay,Chief Minister, Chhattisgarh) को सौंपा।

माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए इसे प्रदेश के पर्यटन की उपलब्धियों में एक नया आयाम बताया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा जी(Mr. Vijay Sharma, Deputy Chief Minister), खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल जी(Mr. Dayal Das Baghel, Food Minister ), वन मंत्री श्री केदार कश्यप जी(Mr. Kedar Kashyap, Forest Minister), उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन जी(Mr. Lakhan Lal Devangan,Industry Minister), स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल जी(Mr. Shyaam Bihari Jaiswal,Health Minister) एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाडे़ जी(Ms. Laxmi Rajvade,Women and Child Development Minister) उपस्थित रहीं।


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